शोध में दावा- फूड हेबिट नींद पर असर डालती है, डाइट पैटर्न बिगड़ता है; हरी सब्जी और फाइबर युक्त भोजन लें
यह साल कोरोना के चलते हेल्थ के लिए अच्छा नहीं रहा। लोगों में कोरोना को लेकर जो डर बना है, वो अब उनके मानसिक तनाव की वजह बन रहा है। इससे उनकी लाइफस्टाइल पर भी असर पड़ा है। इस समय नींद न आने की समस्या और सही डाइट न ले पाना जैसी तमाम परेशानियों से लोग जूझ रहे हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो नींद की समस्या से बचने के लिए रेग्युलर एक्सरसाइज करना, टीवी कम देखना और सोशल मीडिया पर कम समय बिताना होगा।
वहीं लोगों का कहना है कि बेहतर डाइट पैटर्न फॉलो न कर पाने से स्ट्रेस इनसोमेनिया एक समस्या बनकर उभरी है। अमेरिका में हुई एक रिसर्च में सामने आया है कि जो भी डाइट लेते हैं, उससे आपकी नींद पर भी असर पड़ता है। यही नींद आपके खानपान पर भी असर डालती है।
शोधकर्ताओं ने अपनी स्टडी में पाया है कि शुगर, सेचुरेटेड फैट और कार्बोहाइड्रेट युक्त फूड आपकी नींद पर असर डालते हैं। इसके अलावा हरी सब्जी और ज्यादा फाइबर वाले फूड आपकी नींद बढ़ाने में मदद करते हैं।
अब तक हुई स्टडी में क्या सामने आया है?
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आहार और नींद को लेकर अमेरिका में हुई एक और स्टडी में सामने आया कि जो नींद की समस्या से जूझ रहे हैं, उसकी वजह उनकी खराब डाइट है। लोगों की डाइट में प्रोटीन की कमी, सब्जी- फल की कम मात्रा और शुगर युक्त फूड की मात्रा ज्यादा पाई गई है।
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इसके अलावा आहार और नींद के पैटर्न को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने कुछ एक्सपेरिमेंट भी किए। इसमें उन्होंने लोगों से अपने हिसाब से आहार लेने को कहा और फिर उनकी नींद पैटर्न में हुए बदलावों पर नजर रखी। इसमें दूध और जूस पीने से होने वाले बदलावों को भी देखा गया। लेकिन इस तरह के एक्सपेरिमेंट बहुत कम ग्रुप के लोगों पर किए गए।
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इसके अलावा फूड इंडस्ट्री ने भी कुछ एक ट्रायल कराए। कीवी फ्रूट की कंपनी जेसपरी इंटरनेशनल ने एक स्टडी की थी। उन्होंने 4 सप्ताह तक लोगों के सोने से एक घंटे पहले कीवी फल खाने को दिया। इस दौरान उनकी नींद में सुधार देखने को मिला। स्टडी के लेखकों ने इसके रिजल्ट में पाया कि कीवी में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। हालांकि यह स्टडी भी छोटे ग्रुप पर की गई थी।
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एक स्टडी चेरी इंडस्ट्री ने भी कराई। इसमें पाया गया कि चेरी जूस पीने से इनसोमेनियां से जूझ रहे लोगों की नींद बेहतर हुई है। उनके शरीर के अंदर ट्रायटोफेन की मात्रा बढ़ी। ट्रायटोफेन एक तरह का अमीनो एसिड है, जो कई तरह के फूड में पाया जाता है।
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डाइट और नींद में कनेक्शन को लेकर शोध कर चुकीं डॉ. सेंट ओंजे ने पाया कि लोगों को एक- दो फूड पर नजर रखने की बजाय उनकी पूरी डाइट पर फोकस करना होगा। उन्होंने एक क्लिनिकल ट्रायल किया। इसमें उन्होंने एडल्ट को शामिल किया। चार दिन तक उनकी डाइट हेविट को कंट्रोल किया। उन्हें न्यूट्रिशन युक्त फूड खाने को दिया और उनकी नींद पर नजर पर रखी। 5वें दिन बाद सभी को उनका मनपसंद खाना खाने को दिया गया।
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शोधकर्ताओं ने पाया कि ज्यादा फेट युक्त फूड खाने और कम फाइबर युक्त फूड खाने से नींद में सुधार आया है। साथ ही यह भी सामने आया कि कार्बोहाइड्रेट वाले फूड खाने से भी नींद पर असर पड़ा है। प्रोटीन और फेट युक्त डाइट लेने वालों की तुलना में कार्बोहाइड्रेट युक्त डाइट लेने वालों को जल्दी नींद आ गई।
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डॉ . सेंट ओंजे कहती हैं, अगर लोग अपने आहार में ज्यादा शुगर और कार्ब्स युक्त फूड लेते हैं। तो वह जल्दी उठने लगते हैं। कार्ब्स फूड, जैसे- ब्रेड, पेस्ट्री, पास्ता खाने से नींद जल्दी आती है। वहीं कार्ब्स और फाइबर मिश्रित युक्त फूड खाने से गहरी नींद आती है।
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डॉ. ओंजे कहती हैं कि कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट फूड खाने से ब्लड और शुगर लेवल नॉर्मल रहता है। जिससे नींद बेहतर होती है।
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अच्छी नींद के लिए डाइट सही रखना जरूरी
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मेडिटेरियन डाइट लेने से नींद अच्छी होती है। इस तरह के डाइट पैटर्न में सब्जियां, सभी तरह के फूड ग्रेन, दूध- दही का सेवन करना चाहिए। एक स्टडी में पाया कि जो भी इस तरह की डाइट फॉलो करते हैं, उन्हें कभी भी इनसोमेनियां या नींद की समस्या से जूझना नहीं पड़ता है। हालांकि इसको लेकर अभी और रिसर्च करने की जरूरत है।
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वैज्ञानिकों ने पाया है कि जिनकी डाइट अच्छी नहीं होती और नींद की समस्या से जूझते हैं। उन्हें मानसिक समस्याएं होती है। वह जंक फूड खाने लगते हैं।
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क्लिनिकल ट्रायल में देखा गया है कि जिन एडल्ट्स को 4 से 5 घंटे के लिए सोने को कहा था। उन्होंने सबसे ज्यादा कैलोरी युक्त आहार लिए। इस दौरान उन्होंने अनुभव किया कि उनमें भूख बढ़ गई और खाने में ज्यादा मीठा लेने लगे।
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डॉ सेंट ओजें कहती हैं कि जो पुरुष कम सोते हैं, उनके अंदर भूख बढ़ जाती है और खाना ज्यादा खाने लगते है। वहीं महिलाओं में भी इस तरह की आदत बढ़ जाती है।
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किंग्स कॉलेज लंदन में हुई एक स्टडी में सामने आया कि सही नींद लेेने से आपकी विल पावर बढ़ती है। फूड हेबिट भी बदल जाती है। जिन लोगों को कम सोने की आदत थी, उनके सेशन किए गए। इस दौरान उनकी नींद और डाइट भी बेहतर हुई। इसमें कई लोगों ने शुगर कम मात्रा में लेना शुरू कर दिया।
डाइट और नींद एक दूसरे से जुड़े हुए हैं
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हॉवर्ड मेडिकल स्कूल में प्रोफेसर फिजिशियन डॉ. सुसान रेडलाइन कहती हैं कि डाइट और नींद एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। अगर नींद में सुधार होगा तो डाइट में सुधार होगा। हेल्दी डाइट और हेल्दी स्लीप आपके हेल्थ बिहेवियर को बढ़ाते हैं।
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