देश में कोरोना से अब तक 99.06 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं। इस बीमारी से 94.21 लाख लोग रिकवर हुए, तो 1.43 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका में पिछले शुक्रवार को पब्लिश हुई एक स्टडी में नई बात सामने आई है। स्टडी का दावा है कि कोरोना से गंभीर रूप से बीमार मरीजों को रिकवर करने में रेमडेसिविर के साथ आर्थराइटिस की दवा बारिसिटिनिब (Baricitinib) मदद कर सकती है।
अमेरिकन गवर्नमेंट ने भी क्लिनिकल ट्रायल के तीन हफ्ते बाद इसकी पुष्टि की है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने दवा के इमरजेंसी उपयोग की इजाजत दी है। इससे पहले WHO ने कोरोना के इलाज में रेमडेसिविर के उपयोग पर रोक लगाने की मांग की थी।
कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट फायदेमंद
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स्टडी के मुताबिक, मरीजों को बारिसिटिनिब और रेमडेसिविर की दवा का कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट दिया गया। इस दौरान कोरोना के मरीजों की स्थिति में तेजी से सुधार देखा गया। जबकि अकेले रेमडेसिविर देने पर मरीजों की रिकवरी में तेजी नहीं देखी गई थी।
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कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट के तरीकों को अपनाने को लेकर कुछ सवाल भी हैं। इसका खर्च एक मरीज पर 1500 डॉलर के करीब पड़ रहा है। इसमें ब्लड क्लॉट के साइड इफेक्ट का हवाला भी दिया गया है।
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वहीं कुछ डॉक्टर का सवाल है कि क्या कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट फायदेमंद होगा? यह सवाल इसलिए क्योंकि डेक्सामेथासोन जैसे स्टेरॉयड बहुत सस्ते और आसानी मिल जाते हैं।
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न्यू इंग्लैंड जरनल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित पेपर में सामने आया है कि कुछ मरीजों को बारिसिटनिब का फायदा हुआ है। ट्रायल में 1 हजार मरीजों को रेमडेसिविर दी गई। जो लोग गंभीर रूप से बीमार थे, और जिन्हें हाई डोज की जरूरत थी। इसके बाद रेमडेसिविर और बारिसिटिनिब का कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट दिया गया। मरीजों में पहले की तुलना में 8 दिन तेजी से रिकवरी देखी गई।
- क्या आइसोलेशन का समय कम कर देना चाहिए? जानें एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों की राय
एक्सपर्ट्स की क्या राय है?
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एमोरी यूनिवर्सिटी के फिजिशियन डॉ. बोघुमा कैबिसेन टिटांजी कहते हैं कि इस ग्रुप पर हुए ट्रीटमेंट से जो डेटा प्राप्त हुआ है। उसमें बारिसिटिनिब का अहम रोल बताया गया है।
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इसके अलावा वह कहते हैं कि जो डेटा से संकेत मिले कि मौत की कगार पर पहुंच चुके कोरोना मरीजों या वेंटिलेटर की जरूरत वाले मरीजों को रेमडेसिविर के साथ बारिसिटिनिब देने से बचाया जा सकता है।
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बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक रूमेटोलॉजिस्ट डॉ. लॉरेन हेंडरसन का कहना है कि कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई में नए तरह के इलाज ने उन्हें प्रोत्साहित किया है।
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लॉरेंस और कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोरोना के जिन गंभीर मरीजों को रेस्पिरेटरी सपोर्ट की आवश्यकता है। उन्हें डेक्सामेथासोन दी जा सकती है। ।
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डॉ. एरिन मेकक्रेयरी स्टडी के आधार पर कहते हैं कि बारिसिटिनिब के अलावा डेक्सामेथासोन भी कोरोना के मरीजों की मृत्यु दर रोकने में मदद कर सकती है। यह बहुत सस्ती और आसानी से मिलने वाली दवाई है। जबकि बारिसिटिनिब को एक विशेष दवा के तौर पर जाना जाता है।
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कुछ एक्सपर्ट्स नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ट्रायल की तरफ इशारा करते हैं। उनका कहना है कि यह सभी इंस्टीट्यूट दो कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट की तुलना करेंगे। सबसे पहले एक मरीज को रेमडेसिविर और बारिसिटिनिब का कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट देंगे। दूसरे कोरोना के मरीज को रेमडेसिविर और डेक्सामेथासोन का कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट देंगे। डॉ मेकक्रेयरी इसके इंक्रीमेंटल फायदे को जानने के लिए बारिसिटिनिब और डेक्सामेथासोन के ट्रीटमेंट का अध्ययन करेंगे।
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यूनिवर्सिटी ऑफ नेबब्रास्का मेडिकल सेंटर के फिजिशियन डॉ. आंद्रे कलिल कहते हैं कि कोरोना के इलाज के लिए डेक्सामेथासोन का सबसे ज्यादा उपयोग किया गया है। हालांकि इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। जैसे- डायबिटीज या ओस्टियोपोरोसिस।
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